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छठ पूजा पर निबंध (600 शब्दों में)

हमारे देश भारत में बहुत सारे त्यौहार मनाए जाते हैं , इसलिए भारत को त्योहारों का देश भी कहा जाता है। यहां पर हर त्यौहार और पर्व हमें सामाजिक एकता ,अखंडता ,आस्था, श्रद्धा और भक्ति का संदेश देता है। इन्हीं पर्वों में से एक है छठ पूजा, जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्र में बड़ी श्रद्धा और भक्ति से मनाई जाती है। यह पर्व सूर्य देव और छठी मैया की उपासना का प्रतीक है। यह त्यौहार धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के साथ-साथ इसमें प्रकृति, स्वास्थ्य, पर्यावरण और अनुशासन का अद्भुत हमें देखने को मिलता है।

Table of Contents

छठ पूजा का अर्थ और महत्व
छठ शब्द संस्कृत के षष्ठी शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है छठवां दिन। छठ पर्व कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। छठ पूजा में सूर्य देव की पूजा अर्चना और उपासना की जाती है। यह मान्यता है कि सूर्य देव की उपासना करने से जीवन में सुख, स्वास्थ्य ,समृद्धि और शुद्धता बनी रहती है। इसके साथ ही साथ लोग छठी मैया की भी पूजा अर्चना और उपासना करते हैं जो बच्चों की दीर्घायु और परिवार की सुख समृद्धि की मनोकामनाएं पूर्ण करती है।

छठ पूजा की कथा
छठ पूजा से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित है जिसमें से एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार जब पांडवों ने अपना सब कुछ जुए में हर दिया था द्रौपदी ने छठी मैया की पूजा की थी उनकी भक्ति से पांडवों को पुनः राज्य और समृद्धि की प्राप्ति हुई। दूसरी कथा के अनुसार सूर्यपुत्र कर्ण जो महाभारत के वीर योद्धा थे वे भी सूर्य देव के उपासक थे और जल में खड़े होकर सूर्य को अर्घ्य देते थे इन्हीं कथाओं के कारण या पूजा सूर्य की उपासना से जुड़ी हुई है।

छठ पूजा की विधि एवं परंपराएं
छठ पूजा चार दिनों तक चलने वाला महापर्व है जिसमें भक्ति अत्यंत शुद्धता नियम और आत्म संयम का पालन करते हैं।
1. पहला दिन- नहाए खाए: इस दिन भक्त गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करते हैं और शुद्ध भोजन बनाकर खाते हैं।

2.दूसरा दिन – खरना : इस दिन व्रती पूरे दिन निर्जल उपवास रखता है और शाम को गुड़ और चांवल की खीर बनाकर प्रसाद ग्रहण करता है।

3. तीसरा दिन- संध्या अर्घ्य: इस दिन व्रती जलाशय या नदी किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करता है। महिलाएं इस दिन पारंपरिक सुंदर साड़ी पहनती है और ‘कोसी भरना’ की परंपरा निभाती है।

4 चौथा दिन- उषा अर्घ्य : अंतिम दिन प्रातः काल उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है जिसके बाद पूजा पूर्ण होती है इसके बाद व्रती अपना व्रत तोड़ता है और परिवार में प्रसाद बांटा जाता है।

सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्व
छठ पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है बल्कि यह वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। इस पर्व में लोग नदी या तालाब में खड़े होकर सूर्य की पहली और अंतिम करने ग्रहण करते हैं जिससे शरीर को विटामिन डी मिलता है। साथ ही यह पर्व पर्वत ,जल संरक्षण और स्वच्छता का भी संदेश देता है। छठ में फल, गन्ना, नारियल और ठेकुआ जैसे प्राकृतिक पदार्थ का उपयोग किया जाता है जिससे पर्यावरण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

समापन
छठ पूजा भारतीय संस्कृति की शुद्धता अनुशासन और भक्ति की अनूठी संगम है उदाहरण है। इस पर्व में दिखने वाली सामूहिक एकता आपसी सहयोग और श्रद्धा वास्तव में हमारे समाज की सच्ची पहचान है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि जब मन में सच्ची निष्ठा और आस्था होती है तब जीवन में हर कठिनाई को पार किया जा सकता है। इस प्रकार छठ पूजा केवल सूर्य देव की आराधना नहीं बल्कि जीवन में प्रकाश ऊर्जा और सकारात्मक लाने का प्रतीक है।

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